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कविता

सूर्य की सिंचाई

अभिज्ञात


जब सुबह वे कर रहे होते हैं मार्निंग वॉक
देखते हैं
जल रही होती हैं कई लोगों के घर के सामने बत्तियाँ
जिनका स्विच बुझा देते हैं बूढ़ों की एक टोली के कुछ बुजुर्ग
कोसते हैं उनकी लापरवाही को
कि रात में वे लाइट जलाना नहीं भूलते
लेकिन सुबह बत्ती बुझाना

भूल जाते हैं
उन्हें याद नहीं रहता कि इतना तड़के तो नहीं टूट जाती सबकी नींद

सभी सोने वाले
नहीं करते सुबह का इंतजार
जैसा वे करते हैं बेताबी से
कि सुबह हो और वे जाएँ टहलने उन लोगों के साथ
जो उनसे भी ज्यादा बेकरारी से करते हैं इंतजार सुबह का

क्योंकि उनके पास किसी और चीज का इंतजार बचा नहीं होता

और दरअसल वे जिसका करते रहते हैं इंतजार
उसके खयाल से ही उड़ी रहती हैं उनकी नींद
और जिसे वे छिपाते हैं सबसे

सबको
हाँ, सबको पता होता है कि वे कहीं जाने के लिए प्रतीक्षारत हैं
और किसी भी क्षण उनका आ सकता है बुलावा
उनके बुलावे की
उनसे अधिक उनके करीबी लोगों को रहती है प्रतीक्षा
वे काफी अरसे तक अपने घर में ऐसे रहते हैं जैसे रह रहे हों प्रतीक्षालय में
मार्निंग वॉक करते समय मौसम की चर्चा करना वे नहीं भूलते
दूसरी सारी चर्चाओं से बचने के लिए
लौटते समय देखतें हैं कुछ लोगों को लोटे से सूर्य को जल चढ़ाते हुए
और कहते हैं
इसीलिए, हाँ इसीलिए नमी रहती है प्रातःकाल फिजा में
रोज कहीं न कहीं, कोई न कोई
कर रहा होता है सूर्य की सिंचाई।


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